अंतरराष्ट्रीय मेहमाननवाज़ी: लुंबिनी मार्ग पर सोनौली में थाई महारानी का ऐतिहासिक स्वागत

 



सोनौली, महराजगंज।


थाईलैंड की महारानी चखुन सिनीनात वांगवजीरापकडी गुरुवार को लगभग तीन घंटे तक सोनौली में रहीं। लुंबिनी (नेपाल) जाते समय उनका सोनौली स्थित 960 थाई बौद्ध विहार में भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच महारानी विहार पहुंचीं, जहां उन्होंने विश्व कल्याण की कामना करते हुए विशेष प्रार्थना की।


विहार में प्रवास के दौरान महारानी ने कर्मचारियों एवं भिक्षुओं से संवाद किया और उन्हें उपहार भी प्रदान किए। आध्यात्मिक वातावरण और बौद्ध परंपराओं से ओत-प्रोत इस कार्यक्रम ने सभी को प्रभावित किया। तीन घंटे रुकने के बाद महारानी लुंबिनी के लिए रवाना हो गईं, जहां वे माया मंदिर के दर्शन करेंगी। इसके उपरांत वे चार्टर्ड विमान से थाईलैंड प्रस्थान करेंगी।



कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। एसडीएम नौतनवा नवीन कुमार, सीओ अंकुर गुप्ता सहित एसएसबी के अधिकारी और जवान सुरक्षा में तैनात रहे।


70 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यात्रा

महारानी 70 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत-नेपाल की बौद्ध स्थलों की यात्रा पर हैं। बोधगया और कुशीनगर के दर्शन के बाद वे सोनौली होते हुए नेपाल गईं। 960 थाई बौद्ध विहार के मैनेजर राजेश शुक्ला ने बताया कि महारानी चार्टर्ड विमान से थाईलैंड से भारत आई थीं, लेकिन भारत को करीब से देखने की इच्छा के कारण उन्होंने स्थल मार्ग से यात्रा की।


इस अवसर पर फ्रा फ्रोम बजरा बौद्धि वोंग, फ्रा सोंग क्रान, फ्रा सोंग पोंग, फ्रा रंगसीत सहित कई गणमान्य भिक्षु उपस्थित रहे। महारानी के आगमन से सोनौली क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना रहा।

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